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संस्मरण: विद्याभूषण द्विवेदी जिन्हें बिहार का सफदर हाशमी कहते थे
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संस्मरण: विद्याभूषण द्विवेदी जिन्हें बिहार का सफदर हाशमी कहते थे

लगभग दो महीने रहने के पश्चात 16 जुलाई, 1996 को विद्याभूषण द्विवेदी वापस दिल्ली जा रहे थे। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) का प्रथम वर्ष पूरा करने के पश्चात वे गर्मी की छुट्टियों में पटना आए थे। पटना जंक्शन के प्लेटफॉर्म न. 2 पर उनके चाहने वाले उन्हें विदा करने पहॅंचे थे। खासी संख्या में प्रेरणा...

फिदेल कास्त्रो की पुण्यतिथि: अगर क्यूबा गिरा तो हम सब गिर जाऐंगे
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फिदेल कास्त्रो की पुण्यतिथि: अगर क्यूबा गिरा तो हम सब गिर जाऐंगे

आज 25 नवम्बर है। पांच वर्ष पूर्व आज ही के दिन क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति तथा लैटिन अमेरिका सहित समूची दुनिया में क्रांतिकारी शक्तियों के प्रतीक पुरुष फिदेल कास्त्रो का नब्बे साल की उम्र में निधन हो गया था। फिदेल कास्त्रो के बाद क्यूबा में साम्रजावादी ताक़तें खुले रूप से वहां की कम्युनिस्ट सरकार को...

गुरु दत्त साहब जैसा अद्वितीय शैलीकार, रचनाकार और कलाकार कोई दूसरा न हुआ
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गुरु दत्त साहब जैसा अद्वितीय शैलीकार, रचनाकार और कलाकार कोई दूसरा न हुआ

“अल गैहान का एक शजरपरवाज भरती हयातअहद के उस रजनीऐसा खोया कीउसकी फिर सहर न हो सकीउसे तो ‘प्यासा’ जाना था छोड़कर” जी हाँ! हम बात कर रहे हैं अद्वितीय शैलीकार, रचनाकार, कलाकार, गुरु दत्त साहब की। नर्तक, कोरियोग्राफर से होते हुए लेखक, अभिनेता, निर्माता, निर्देशक के बहुविध कला यात्रा के मुक्कमल यात्री की। आज...

आर्यन केस में नया मोड़, गोसावी के बॉडीगार्ड का दावा, खाली कागज पर जबरन साइन करवाया
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आर्यन केस में नया मोड़, गोसावी के बॉडीगार्ड का दावा, खाली कागज पर जबरन साइन करवाया

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान से संबंधित मुंबई क्रूज ड्रग्स केस नया मोड़ आ गया है। फरार किरण वी. गोसावी के बॉडीगार्ड प्रभाकर सैल ने एक नोटरीकृत हलफनामे में चौंका देने वाले खुलासे किए हैं। ऑर्थर रोड जेल में बंद आर्यन खान को लेकर किरण गोसावी के बॉडीगार्ड ने खुलासा किया है...

महात्मा गाँधी के रास्तों पर चलकर ही आदर्श भारत और शराबबंदी का मार्ग प्रशस्त
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महात्मा गाँधी के रास्तों पर चलकर ही आदर्श भारत और शराबबंदी का मार्ग प्रशस्त

विश्व में अनेक महापुरुष अवतरित हुए हैं जिनकी शिक्षा ने संसार के प्रत्येक जनमानस को प्रभावित किया है। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। भारतीय सामाजिक परिदृश्य में महात्मा गाँधी के विचारों ने आमजन के मन-मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ी है। गाँधी भारतीय परिवेश में हमेशा प्रासंगिक रहे हैं। उनके विचारों से प्रेरणा लेकर हजारों...

नियंत्रण खो रही कांग्रेस, अब केंद्रीय नेतृत्व को मजबूत होना होगा
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नियंत्रण खो रही कांग्रेस, अब केंद्रीय नेतृत्व को मजबूत होना होगा

कांग्रेस पार्टी भारत का सबसे पुराना राजनीतिक दल है, जिसने आजादी के बाद से लगातार लंबे समय तक केंद्र में सरकार चलाई है परन्तु हम देखते हैं कि इंदिरा गांधी के बाद से कांग्रेस पार्टी लगातार कमज़ोर होती आई है और आज इस स्तर पर पहुंच गई है कि हर नेता अपनी मर्जियां चला रहा...

फिल्म ‘तीसरी कसम’ : न कोई इस पार हमारा, न कोई उस पार
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फिल्म ‘तीसरी कसम’ : न कोई इस पार हमारा, न कोई उस पार

रेणु की चर्चित कहानी ‘तीसरी कसम उर्फ़ मारे गए गुलफ़ाम’ पर आधारित फिल्म ‘तीसरी कसम'(1966) की काफ़ी चर्चा होती रही है। फिल्म के निर्माता गीतकार शैलेन्द्र थे।उन्होंने बहुत उत्साह और जोख़िम से फिल्म का निर्माण कराया था, मगर अपेक्षित सफलता नहीं मिलने पर काफ़ी आहत भी हुए थे, जिसकी एक अलग कहानी है। कहानी और...

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की वैचारिक दृष्टि
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राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की वैचारिक दृष्टि

रामधारी सिंह दिनकर के दृष्टिकोण को परस्पर दो प्रमुख विचारधाराओं के परिप्रेक्ष्य में रखकर समझा जा सकता है। उनके दृष्टिकोण का पहला ध्रुव मार्क्सवाद है और दूसरा ध्रुव गांधीवाद है। वे विचारधाराओं के इन्हीं दो ध्रुवों के बीच आजीवन आवाजाही करते रहे हैं। अनेक अवसरों पर गांधी से उनकी असहमतियां भी प्रकट हुई हैं, इसलिए...

जयंती विशेष: समय की सलीबों पर राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’
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जयंती विशेष: समय की सलीबों पर राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’

मौजूदा समय में दिनकर की ‛राष्ट्रवाद’ संबंधी समझ को दृढ़ता के साथ रेखांकित करने की जरूरत है क्योंकि हिंदुत्ववादी शक्तियां उनकी राष्ट्रीय भावों की ओजपूर्ण कविताओं के सहारे अपने अंधराष्ट्रवाद के अभियान को साधना चाहती हैं। यह अकारण नहीं है कि हिमालय के शिखरों पर चढ़कर उनकी कविताओं के ‛आलाप’ किए जा रहे हैं। ऐसा...

संस्मरण : सैयद अली शाह गिलानी- कश्मीर में अलगाववाद के प्रतीक
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संस्मरण : सैयद अली शाह गिलानी- कश्मीर में अलगाववाद के प्रतीक

1 सितम्बर 2021 को पाकिस्तान में जम्मू और कश्मीर के विलय के समर्थक और अलगाववाद के नेतृत्व का सैयद अली शाह गिलानी के देहावसान के साथ एक युग का अंत है। वो 92 वर्ष के थे। गिलानी साहब ‘जमात-ए-इस्लामी’ के सदस्य रहे, विधानसभा के भी सदस्य रहे, हुर्रियत कांन्फ्रेंस में रहे और उससे अलग होकर...