Category: <span>ओपिनियन</span>

Home ओपिनियन
मुसलमान और अरब को आमतौर बदमाश फिल्मों में दिखाने की परम्परा
Post

मुसलमान और अरब को आमतौर बदमाश फिल्मों में दिखाने की परम्परा

बॉलीवुड में मुसलमान करैक्टर को आमतौर पर विलेन या बदमाश दिखाने की परम्परा रही है। हालांकि, हॉलीवुड जो अपने आपको सबसे मैच्योर कहता है इस दकियानूसी से परे नहीं है। कई लोगों को लगता है कि वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन पर 9/11 हमले के बाद से ये शुरू होता है। लेकिन यह सोच सही...

किशोरी प्रसन्न सिंह : एक ईमानदार और सच्चा स्वतंत्रता सेनानी
Post

किशोरी प्रसन्न सिंह : एक ईमानदार और सच्चा स्वतंत्रता सेनानी

सात दिसंबर 1920 को महात्मा गाँधी हाजीपुर आने वाले थे। जहाँ उनकी सभा होनी थी, स्टेशन से वहाँ तक जाने का रास्ता ठीक नहीं था। उस रास्ते को ठीक करने के लिए छात्रों का एक समूह अपने शिक्षक के नेतृत्व में लगभग तीस किलोमीटर दूर से सभा के एक दिन पहले यानी छह दिसंबर को...

वेलेंटाइन डे और पप्पू जी
Post

वेलेंटाइन डे और पप्पू जी

प्रेम का आयातित पर्व ‘वेलेन्टाइन डे’ जैसे-जैसे निकट आता जा रहा था, पप्पू जी के दिल का रोमांच दिन-दूनी और रात चौगुनी गति से बढ़ता जा रहा था। पप्पू जी के पिता जी दिल्ली के खेल विभाग में अधिकारी थे और फिलहाल कॉमनवेल्थ घोटाले की वजह से तिहाड़ जेल में कैद थे। उनकी मां एक...

पत्रकारिता और लोकतंत्र समर्थकों को न्यूजक्लिक पर हुए हमले की निंदा करनी चाहिए
Post

पत्रकारिता और लोकतंत्र समर्थकों को न्यूजक्लिक पर हुए हमले की निंदा करनी चाहिए

मैं पत्रकारों पर हमले, कार्यकर्ताओं और लेखकों की गिरफ्तारी के बारे में पढ़ती रही हूँ और देख रही हूँ कि असहमति के सभी लोकतांत्रिक जगहों को कैसे समाप्त किया जा रहा है। 2010 से 2020 के बीच 150 से अधिक पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया, हिरासत में लिया गया और उनसे पूछताछ की गई, पत्रकार...

व्यंग्य | सोशल मीडिया पर रहता हूँ, मैं चितकबरा हूँ
Post

व्यंग्य | सोशल मीडिया पर रहता हूँ, मैं चितकबरा हूँ

मुझे पता है कि चुनाव क्या होता है। मुझे ये भी पता है कि चुनाव में मतदान किसे करना है। मैं ये भी जानता हूँ कि ईवीएम में किसके नाम की बत्ती जलानी है और बाहर आकर दोस्तों से क्या बताना है। आप लोगों को लग रहा होगा कि सिर्फ नेता ही चितकबरा होते हैं।...

जयन्ती विशेष: एक मौलाना हसरत मोहानी भी थे!
Post

जयन्ती विशेष: एक मौलाना हसरत मोहानी भी थे!

पाकिस्तान के करांची शहर में हसरत मोहानी नाम की एक बड़ी कॉलोनी है। वहाँ हसरत मोहानी नाम से एक बड़ी सड़क भी है। करांची में ही एक हसरत मोहानी मेमोरियल सोसाइटी है और एक हसरत मोहानी मेमोरियल लाइब्रेरी भी है।

मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनने में वामपंथियों की रही आत्मघाती भूमिका
Post

मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनने में वामपंथियों की रही आत्मघाती भूमिका

अब भारत में वामपंथी राजनीति का पूरी तरह पराभव हो गया है। वामपंथी राजनीति पतन के जिस गर्त में डूब चुकी है, उससे अब उसका निकल पाना फिलहाल संभव नहीं लग रहा है। आज वामपंथी राजनीति जिस हालत में पहुंच गई है, उसके पीछे ऐतिहासिक कारण रहे हैं। भारत में जब वामपंथ का उदय हुआ...

घटिया मनोरंजन का साधन बनती जा रही हैं समाचार वेबसाइट्स
Post

घटिया मनोरंजन का साधन बनती जा रही हैं समाचार वेबसाइट्स

िंदी में वेब पत्रकारिता को शुरू हुए ज्यादा साल नहीं हुए हैं, पर प्राय: सभी बड़े-छोटे मीडिया समूहों ने अपनी वेबसाइटें शुरू कर दी हैं। इंटरनेट के प्रसार और इंटरनेट डाटा के लगातार सस्ता होते चले जाने के कारण वेबसाइटों की पहुंच भी लोगों तक लगातार बढ़ती जा रही है।

कम्युनिस्ट नैतिकता के बिना आर्थिक समाजवाद मुझे आकर्षित नहीं करता
Post

कम्युनिस्ट नैतिकता के बिना आर्थिक समाजवाद मुझे आकर्षित नहीं करता

पीठ पर बंधे थैले के वजन से दब कर वे जमीन पर गिर पड़े। किसी तरह बैठने के बाद थैले को उन्होंने मुश्किल से उतारा। अपनी डायरी के लिए थैले के अंदर हाथ डाल टटोला। थैले के बाकी चीजों के बीच डायरी थोड़ी छुपी सी थी। उन्होंने इलाके के भौगौलिक नक्शे को पीछे किया। इस...

भोर का सपना: नोट से गायब गांधीजी की तस्वीर रह-रहकर उभर रही है!
Post

भोर का सपना: नोट से गायब गांधीजी की तस्वीर रह-रहकर उभर रही है!

किसी बहुत बड़े सरकारी अस्पताल के वार्ड से निकल रहा हूँ। शायद मुझे डिस्चार्ज किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। मुझसे कहा गया है कि मैं अपना बैग, पर्स, चश्मा आदि डिस्चार्ज डेक्स से जा कर ले लूँ। धीरे-धीरे चलकर मैं डिस्चार्ज डेस्क के पास पहुंचता हूं। एक अधेड़ उम्र की नर्स अपने मोबाइल...