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सबकुछ बिकने और बेचे जाने के दौर में फिल्म ‘मंथन’ देखनी चाहिए

सबकुछ बिकने और बेचे जाने के दौर में फिल्म ‘मंथन’ देखनी चाहिए

सहकारिता समाजवाद का गोमुख है। एक समतावादी समाज का निर्माण उसके सदस्यों के पारस्परिक सहयोग और भाईचारा से ही सम्भव है। प्राकृतिक संसाधनों और उससे निर्मित उत्पादों का नियंत्रण एवं नियमन समाज के सदस्यों द्वारा किए जाने पर ही प्रत्येक व्यक्ति को उसके योगदान के अनुरूप प्रतिफल प्राप्त हो सकता है। सभ्यता के प्रारंभिक मंज़िल से गण समाजो तक मानव...

सबकुछ बिकने और बेचे जाने के दौर में फिल्म ‘मंथन’ देखनी चाहिए

सबकुछ बिकने और बेचे जाने के दौर में फिल्म ‘मंथन’ देखनी चाहिए

सहकारिता समाजवाद का गोमुख है। एक समतावादी समाज का निर्माण उसके सदस्यों के पारस्परिक सहयोग और भाईचारा से ही सम्भव...

महबूब खान की फिल्म ‘मदर इंडिया’ हर किसी को क्यों देखनी चाहिए!

महबूब खान की फिल्म ‘मदर इंडिया’ हर किसी को क्यों देखनी चाहिए!

भारत में स्त्रियों की स्थिति पितृसत्ता के अधीन विरोधाभासी और द्वंद्वात्मक रही है। समय के साथ इसमें परिवर्तन होता रहा...

स्वामी सहजानंद : तीसरी दुनिया के जनांदोलनों के ऑर्गेनिक इंटेलेक्चुअल

स्वामी सहजानंद : तीसरी दुनिया के जनांदोलनों के ऑर्गेनिक इंटेलेक्चुअल

अभी हाल में सवर्ण जाति के लोगों के नरंसहार, सेनारी नरसंहार, के अभियुक्त साक्ष्य के अभाव में अदालत से बरी...

प्यासा: ये महलों, ये तख्तों, ये ताजों की दुनिया…ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है

प्यासा: ये महलों, ये तख्तों, ये ताजों की दुनिया…ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है

कवि (शाइर) होने की पहली शर्त संवेदनशीलता है। जो व्यक्ति संवेदनशील न हो, जिसे अपने आस-पास की दुनिया की विडम्बनाएं...

मोदी सरकार ने UAPA कानून को बनाया हथियार, मुसलमानों के खिलाफ सबसे ज्यादा इस्तेमाल

मोदी सरकार ने UAPA कानून को बनाया हथियार, मुसलमानों के खिलाफ सबसे ज्यादा इस्तेमाल

ग़ैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किए गए पिंजरा तोड़ संगठन की कार्यकर्ताओं देवांगना कलीता, नताशा नरवाल...

फिल्मों में मुसलमान और अरब को आमतौर पर बदमाश दिखाने की परम्परा क्यों रही है?

फिल्मों में मुसलमान और अरब को आमतौर पर बदमाश दिखाने की परम्परा क्यों रही है?

बॉलीवुड में मुसलमान करैक्टर को आमतौर पर विलेन या बदमाश दिखाने की परम्परा रही है। हालांकि, हॉलीवुड जो अपने आपको...

पत्रकारिता और लोकतंत्र समर्थकों को न्यूजक्लिक पर हुए हमले की निंदा करनी चाहिए

पत्रकारिता और लोकतंत्र समर्थकों को न्यूजक्लिक पर हुए हमले की निंदा करनी चाहिए

मैं पत्रकारों पर हमले, कार्यकर्ताओं और लेखकों की गिरफ्तारी के बारे में पढ़ती रही हूँ और देख रही हूँ कि...

जयन्ती विशेष: एक मौलाना हसरत मोहानी भी थे!

जयन्ती विशेष: एक मौलाना हसरत मोहानी भी थे!

पाकिस्तान के करांची शहर में हसरत मोहानी नाम की एक बड़ी कॉलोनी है। वहाँ हसरत मोहानी नाम से एक बड़ी सड़क भी है। करांची में ही एक हसरत मोहानी मेमोरियल सोसाइटी है और एक हसरत मोहानी मेमोरियल लाइब्रेरी भी है।